कल्पना चावला का जीवन परिचय | Kalpana Chawla Biography in Hindi

Kalpana Chawla Biography in Hindi भारत की पहली अन्तरिक्ष यात्री महिला कल्पना चावला को देश भर की महिलाएं एक आदर्श मानती हैं। कल्पना दो बार अन्तरिक्ष में गई थी। 

kalpana Chawla Biography in Hindi
kalpana Chawla
नामकल्पना चावला
जन्म1 जुलाई 1961
मृत्यु1 फरवरी 2003
पेशाइंजिनियर,टेक्नोलॉजिस्ट
लम्बाई5’7”
पिता का नामबनारसी लाल चावला
माता का नामसंज्योथी चावला
पति का नामजीन पिएरे हैरिसन
प्राथमिक शिक्षाकरनाल से
बीएससीपंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज
एम.एसटेक्सास यूनिवर्सिटी से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग
पीएचडीएयरोस्पेस इंजीनियरिंग में कोलोराडो यूनिवर्सिटी से की
पहली अन्तरिक्ष की यात्रा1996 में STS-87
दूसरी और अंतिम अन्तरिक्ष यात्रा2003 में STS-107 फ्लाइट
मृत्यु का कारणस्पेस शटल का टूटना
अवार्ड्सकांग्रेशनल स्पेस मेडल ऑफ़ ऑनर,नासा अन्तरिक्ष उडान पदक और  नासा विशिष्ट सेवा पदक

भारतीयों के लिए कल्पना का सफर एक सपना से कम नहीं है, भारत ने उनकी स्मृति में अपना पहला मौसम सेटेलाईट कप्लना-1 नाम दिया है। कल्पना के देहांत के बाद, उनके पति भारत आए और उनके शरीर के अवशेषों को हिमालय पर बिखेरा ताकि उनकी आत्मा शांति पाए।

कल्पना चावला का जन्म (Kalpana Chawla Birth

कल्पना चावला जन्म भारत मे हुआ था. इनकी जन्म तिथी 17 मार्च 1962 हैं. कल्पना भारतीय नागरिक थी इनका जन्म हरियाणा के करनाल जिले में हुआ था

कल्पना चावला की शिक्षा (Kalpana Chawla Education)

1982 में, कल्पना ने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से बीएससी एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में भी प्राप्त की। बाद में कल्पना ने टेक्सास यूनिवर्सिटी से 1984 में एरोस्पस इंजीनियरिंग में एमएससी की डिग्री हासिल की। 1988 में उन्होंने कोलोराडो यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की। कल्पना की परवरिश एक स्वतंत्र वातावरण में हुई, जहां मेहनत की प्रशंसा की जाती थी।

कल्पना चावला का परिवार (Kalpana Chawla Family)

कल्पना की दो बहनें दीपा और सुनीता हैं।इसके अलावा संजय नामक एक भाई भी हैं। कल्पना ने अमेरिका में अपनी पढ़ाई के दौरान वहीं शादी करने का निर्णय लिया. उन्होंने अपने फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर जीन पिएरे हैरिसन से शादी की, जिससे उसे अमेरिकी नागरिकता मिली।

Kalpana Chawla Career

1988 में डॉक्टरेट प्राप्त करने के बाद, कल्पना चावला ने नासा के एम्स रिसर्च सेंटर में पॉवर-लिफ्ट कम्प्यूटेशनल फ्लूइड डायनामिक्स में काम करना शुरू किया।एयरक्राफ्ट के आसपास हवा का प्रवाह देखना उनका लक्ष्य था। इस काम के पूरा होने के बाद मैपिंग के साथ फ्लो सॉल्वर में गणना की। 1993 में, कल्पना चावला ने वाईस प्रेसिडेंट और रिसर्च वैज्ञानिक के रूप में ओवरसेटमेथड्स इंक., लोस एटलोस, कैलिफोर्निया में जॉइन किया. यहाँ, उनका काम एक टीम बनाकर मूविंग मल्टीपल बॉडी प्रॉब्लम को अनुकरण करना था। विकास और एयरोडायनामिक ऑप्टिमाइजेशन में आवश्यक तकनीकों का उपयोग करना उसके दायित्व में था। कल्पना चावला ने कई जर्नल्स में कई पेपर्स लिखे हैं।

Kalpana Chawla Experience in NASA

  1. 1994 में कल्पना चावला NASA में चयनित हुई, फिर 1995 में जॉनसन स्पेस सेंटर में एक एस्ट्रोनॉट प्रतिभागी के रूप में एस्ट्रोनॉट के 15वें ग्रुप में शामिल हुई।
  2. साल भर की प्रशिक्षण और मूल्यांकन के बाद, वह EVA/Robotic Computer Branch के एस्ट्रोनॉट ऑफिस में टेक्निकल इशू में क्रू प्रतिनिधि के पद पर नियुक्त हुई।
  3. उन्हें एविओनिकस इंटीग्रेशन लेबोरेटरी में रोबोटिक सिचुएशनल अवरेनेस डिस्प्ले और टेस्टिंग स्पेस शटल कण्ट्रोल सॉफ्टवेयर का नियंत्रण करना था।
  4. नवंबर 1996 में, कल्पना चावला को STS-87 पर मिशन विशेषज्ञ और प्रधान रोबोटिक आर्म ऑपरेटर का पद मिला। उन्हें जनवरी 1998 में शटल और स्टेशन फ्लाइट के लिए क्रू रिप्रेजेन्टेटिव के पद पर नियुक्त किया गया, फिर एस्ट्रोनॉट ऑफिस के क्रू सिस्टम और हैबिटेबिलिटी सेक्शन में काम किया।

    5.1997 में STS-87 पर और 2003 में STS-107 पर 30 दिन, 14 घंटे और 54 मिनट के लिए अंतरिक्ष में गयी।

कल्पना चावला की मौत कैसे हुई (Kalpana Chawla Death)

1 फरवरी 2003 की सुबह, स्पेस शटल कैनेडी स्पेस सेंटर पर लैंड करने वाला था। तब लांच के दौरान ब्रीफकेस के आकार का एक इंसुलेशन टुकड़ा टूट गया, जो शटल के उस विंग को हीट से बचाता था। शटल को विंग के अंदर की गर्म हवा ने ध्वस्त कर दिया जैसे ही वह बाहर आया। मिनट के भीतर, शिप के सभी क्रू सदस्य अस्थायी क्राफ्ट पर गिर पड़े। इसका शटल लुसियाना और टेक्सास पर गिरने से पहले गिर गया। 1986 में शटल चेलेंजेर में हुए विस्फोट के बाद, यह दुर्घटना स्पेस शटल प्रोग्राम के लिए दूसरी बड़ी दुर्घटना थी।

कल्पना चावला और अवार्ड्स (Kalpana Chawla Awards)

कल्पना ने मरने के बाद कई पुरस्कार और सम्मान प्राप्त किए, जिनमें नासा अन्तरिक्ष उडान पदक, कांग्रेशनल स्पेस मेडल ऑफ़ ऑनर और नासा विशिष्ट सेवा पदक शामिल हैं। कल्पना के निधन के बाद 2003 में भारत के प्रधानमंत्री ने मौसमी सेटेलाइट का नाम कल्पना के नाम पर रखने की घोषणा की, जिससे सेटेलाइट को MetSat-1 नाम दिया गया। 12 सितंबर 2002 को MetSat-1 प्रक्षेपित किया गया था। 2004 में कर्नाटक सरकार ने युवा महिला वैज्ञानिको को कल्पना चावला पुरस्कार भी दिया। उन्हें सुपरकंप्यूटर भी नासा ने कल्पना चावला की याद में समर्पित किया।

FAQ

Q : कल्पना चावला कौन थी?

Ans : एक अंतरिक्ष यात्री

Q : कल्पना चावला कैसे मरी थी?

Ans : स्पेस शटल धरती पर लैंड होते समय

Q : कल्पना चावला की उम्र कितनी थी?

Ans : 42 साल

Q : कल्पना चावला की मृत्यु कब हुई?

Ans : 1 फरवरी 2003

Q : कल्पना चावला का जन्म कब हुआ?

Ans : 1 जुलाई, 1961

 

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